एक ओळ माझीही
Tuesday, November 24, 2015
वख्त कि बात
चांद तुझमे भी और मुझमे भी है,
रोशन हरदम तू मुझे और मै तुझे,
नही कर सकते..
(वख्त वख्त कि बात है)
रामास्वामी/०३११२०१५२३२३
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment