एक ओळ माझीही
Tuesday, November 24, 2015
जिक्र !!
जिक्र !!
बातो बातो मे उन
रातोंका जिक्र भी करती रही
बाकी बहुत था बचा
जानेकी फिक्र भी करती रही
©राम मोरे /२०११
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