एक ओळ माझीही
Thursday, November 26, 2015
लम्हे
लम्हो को साम्भालकर रखना यह भी कमाल कि बात है ,
तकलीफ देह होते है कयी लम्हे वख्त ने दिये हुये.....
ताकलीफो को थाम रखने वाले, मेरे लिये यह कमाल कि बात है.....
@रामास्वामी/२३१०२०१५०९४०
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