एक ओळ माझीही
Wednesday, December 30, 2015
अश्क
सदियो से चुपचाप सी सम्भाले रखखि हु अश्को को...
कुछ कागज पर उतरते गये कुछ बारिश मे बह गये.....
©राममोरे/२८१२२०१५१०३७
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