एक ओळ माझीही
Tuesday, December 15, 2015
आग
आग हि तुझ्यात नसू नये का इतकी ही ...
विझती का यातना अश्याच न जळता ही...
@राममोरे/१२१३२०१५२१२८
(स्वैर रूपांतरण)
अगन तुझमे इतनी भी नही बची ये दोस्त..'
गम मेरे जलाये बिन बुझे जा रहे है....
@रामास्वामी/१४१२२०१५१९३९
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